Kheri Pahad Ki
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मैरु हरष मैरु उल्लास कभि कम नि हो – खैरि पहाड़ की by बीर सिंह राणा

मैरु हरष मैरु उल्लास कभि कम नि हो,,,,, मेरा प्राण मेरि सांस कभि कम नि रो,,,, दि द्युलु जान मात्रभुमि का खातिर,,,, मेरी कलम मां कभि स्याही कम न हो,,, उठोन्दी रोलु सुख दुख अपड़ा पहाड़ कु,,,, बोड़े कि ल्योलु खोलदारु बन्द किवाड़ कु,,,,,, सुना पड़िया गो बसोणा कि कोशिश कोलु ,,,,,,,, बांजी पड़ि फोगणियो […]